[100+] Lord Gautama Buddha Thoughts – भगवान बुद्ध के प्रेरक कथन

हम जो कुछ भी हैं वो हमने आज तक
क्या सोचा इस बात का परिणाम है.

यदि कोई व्यक्ति बुरी सोच के साथ
बोलता या काम करता है,
तो उसे कष्ट ही मिलता है.

यदि कोई व्यक्ति शुद्ध विचारों के साथ
बोलता या काम करता है,

तो उसकी परछाई की तरह
ख़ुशी उसका साथ कभी नहीं छोड़ती.


हजारों खोखले शब्दों से

अच्छा वह एक शब्द है जो शांति लाये.


एक जग बूँद-बूँद कर के भरता है.


अतीत पे ध्यान मत दो,

भविष्य के बारे में मत सोचो,

अपने मन को वर्तमान क्षण पे केन्द्रित करो.


स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है,
संतोष सबसे बड़ा धन है,

वफ़ादारी सबसे बड़ा संबंध है.


जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती,

मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता.


अपने मोक्ष के लिए खुद ही प्रयत्न करें.

दूसरों पर निर्भर ना रहे.


किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं

हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं,

और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं.


किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी
और दुष्ट मित्र से अधिक डरना चाहिए,

जानवर तो बस आपके शरीर को
नुक्सान पहुंचा सकता है,
पर एक बुरा मित्र आपकी
बुद्धि को नुक्सान पहुंचा सकता है.


आपके पास जो कुछ भी है है
उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए,

और ना ही दूसरों से ईर्ष्या कीजिये.
जो दूसरों से ईर्ष्या करता है
उसे मन की शांति नहीं मिलती.


आपके पास जो कुछ भी है है
उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए,

और ना ही दूसरों से ईर्ष्या कीजिये.
जो दूसरों से ईर्ष्या करता है
उसे मन की शांति नहीं मिलती.


वह जो पचास लोगों से प्रेम करता है
उसके पचास संकट हैं,

वो जो किसी से प्रेम नहीं करता
उसके एक भी संकट नहीं है.


वह जो पचास लोगों से प्रेम करता है
उसके पचास संकट हैं,

वो जो किसी से प्रेम नहीं करता
उसके एक भी संकट नहीं है.


मैं कभी नहीं देखता कि क्या किया जा चुका है;

मैं हमेशा देखता हूँ कि क्या किया जाना बाकी है.


बिना सेहत के जीवन जीवन नहीं है;

बस पीड़ा की एक स्थिति है- मौत की छवि है.


हर चीज पर सन्देह करो.

स्वयं अपना प्रकाश ढूंढो.


शक की आदत से भयावह कुछ भी नहीं है.

शक लोगों को अलग करता है.
यह एक ऐसा ज़हर है जो मित्रता ख़त्म करता है
और अच्छे रिश्तों को तोड़ता है.
यह एक काँटा है जो चोटिल करता है,
एक तलवार है जो वध करती है.


सत्य के मार्ग पे चलते हुए कोई
दो ही गलतियाँ कर सकता है;

पूरा रास्ता ना तय करना,
और इसकी शुरआत ही ना करना.


बुराई होनी चाहिए ताकि अच्छाई

उसके ऊपर अपनी पवित्रता साबित कर सके.

ख़ुशी अपने पास बहुत अधिक

होने के बारे में नहीं है.
ख़ुशी बहुत अधिक देने के बारे में है.
Facebook Comments
Pages ( 1 of 4 ): 1 234Next »