(100+) Quotes on Victory & defeat in Hindi – जीत और हार पर कथन – हिंदी में

Quotes

ठोकरें खाता हूँ पर ‘शान’ से चलता हूँ,

मैं खुले आसमान के नीचे सीना तान के चलता हूँ!

मुश्किले तो ‘साज़’ हैं जिंदगी का

उठूंगा गिरूंगा फिर उठूंगा

और आखिर में… जीतूंगा मैं ही ये ठान के चलता हूँ….


जीत निश्चित हो तो कायर भी लड़ सकते हैं

बहादुर वो कहलाते हैं जो

हार निश्चित होने पर भी मैदान नही छोड़ते हैं|


गिरने पर भी बार बार उठ जाना और

दुबारा कोशिश करना ही असली जीत हैं|


जिस व्यक्ति ने अपने मन को

नियंत्रित कर लिया, उसने

जीवन का आधा युद्ध जीत लिया|


जीत और मुश्किल दोनों ही बेहतरीन लोगो के

हिस्से में ही आती हैं क्योंकि

वही इसे बेहतर तरीके सेअंजाम दे सकते हैं|


कठिनाईयां और जीत एक दुसरे के पूरक हैं

जहाँ पर कठिनाई होगी वही जीत होगा

और जहाँ जीत होगा वही कठिनाई होगी |


जब दुनिया तुम्हे कमज़ोर समझे तो

तुम्हारा जीतना बहुत जरूरी हो जाता हैं|


जीत हमें ख़ुशी देती हैं और

हार हमें ज्ञान देता हैं इसलिए

जीत और हार दोनों में ही

व्यक्ति का फायदा हैं |


रिवाज़ न हो भले ही

पढ़ी किताबें पढ़ने का

जिंदगी के सीखे सबक

रोज़ याद करने होते है|


क्या हार में क्या जीत में

किंचित नही भयभीत में

कर्तव्य पथ पर जो भी मिले

जीत भी सही और हार भी सही|


घिर चुका था जब मुसीबतों के बीच

हौसला बढाया तो रुकावटों की ईमारत हिल ही गयी

बहुत दूर नजर आ रही थी जो इक दिन

कदम बढाया तो आज मंजिल मिल ही गयी।


मुझे तो खबर भी न थी की

कौन-कौन साथ दौड़ रहा है मेरे

पहुंचा मंजिल पर तो पता चला की

एक लम्बा कारवां मेरे पीछे था|


एक जमाना था जब मैं तलाशता था

रास्ता आसमान तक जाने का

एक आज का दौर है की सारा आसमान मेरा है|


खोटा सिक्का जो समझते थे मुझे

आज मैं उनका ध्यान तोड़ आया हूँ

जिंदगी की राहों में सफ़र लम्बा था मेरा

इसलिए क़दमों के निशान छोड़ आया हूँ।


देखें हवाएँ ले चलें अब कहाँ तक मुझे

मजबूरियों ने चलाया है यहाँ तक मुझे|


मंज़िल होगी आसमाँ ऐसा यकीं कुछ कम है

अपने नक्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है|


कचरे का ढेर दरीचे में रख छोड़ा है मैनें

इन आँधियों का गुरूर कुछ यूँ तोड़ा है मैनें|


बहती धारा के साथ बहो किनारा छोड़ दो

रखो यकीं खुद पे दुनियाँ का सहारा छोड़ दो|


माना कि पहुँच गया हूँ सफलता की

ऊँचाइयों पर आज मैं

लेकिन लोगों के दिलों में उतरने का

हुनर आज भी रखता हूँ।


उड़ान भरी तो इतनी दूर निकल आया मैं

न जाने इस मुकाम का मंजर क्या होगा?


बीत गया है रास्ता की आज मैं अपने मुकाम पर हूँ

सारे सफ़र सताती रही जिंदगी

थक चुका हूँ थोडा आज आराम पर हूँ।


मिल गयी है सफलता तो नजरिये बदले हैं

जो थे कल तक दुश्मन आज करीबी निकले हैं

ना ही बदला हूँ मैं ना ही मेरे अंदाज बदले हैं

ये तो बस शुरुआत थी अभी तो पड़ाव अगले हैं।


किसी की तमन्ना थी तो किसी की उम्मीदें जुड़ी थीं

मेरी सफलता के लिए मेरी मेहनत बहुत कड़ी थी

पहुँच कर मुकाम पर जो मुद कर देखा मैंने तो पाया कि

मुझसे आगे निकलने को दुनिया तमाम खड़ी थी।

Pages ( 1 of 5 ): 1 2345Next »

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *