चेहरे का रंग सांवला या काला तो दिक्कत क्यों! – Face Makeup Tips and Tricks in Hindi

दोस्तों, जैसा की आप जानते है प्रख्यात अभिनेत्री काजोल देवगन अपने चेहरे की सर्जरी करवाकर गोरी हो जाती हैं। वहीं नहीं बहुत से लोग आज काले से गोरा होना चाहते हैं। आजकल तो मार्केट में तरह-तरह के ऐप हैं जो काले से गोरा बड़ी आसानी से बना देते हैं। मैं ख़ुद भी पहले ऐसे ऐप के चक्कर में आ चुका हूँ। पर बीतते समय और बढ़ती हुयी समझ ने आईना भी दिखाया है। फिल्मों में अक्सर काले होने का मजाक उड़ाया जाता रहा है। सबसे बड़ी हैरानी और सोचने की बात तो यह है कि दक्षिण भारत में भी जहाँ की जलवायु के कारण ज़्यादातर लोगों का रंग काला होता है, अपनी फिल्मों में काले लोगों का मज़ाक उड़ाते दिख जाते हैं और वहाँ की फिल्मों में हीरोइनों को रंग देखकर ही लिया जाता रहा है। कई अभिनेत्रियां तो उत्तर भारत से ही जाती रही हैं वहाँ। उनके अंदर किसी काली लड़की को ही हीरोइन बनाने का साहस क्यों नहीं पनप पाता।

मुझे भरत कुमार के नाम से फेमस पहले की फिल्मों के अभिनेता मनोज कुमार के एक गाने की याद आ रही है जिसमें वे गाते हैं कि गोरे काले में भेद नहीं, हर दिल से हमारा नाता है। लेकिन बचपन से अबतक वो नाता जो गोरे-काले के बीच का है, बहुत कम ही देख पाया हूँ। नहीं तो यहाँ फेयर एंड लवली और उसके जैसे तमाम प्रोडक्ट्स धड़ल्ले से नहीं बिक रहे होते। लोगों की डिमांड को ध्यान में रहकर ही बाजार उत्पाद बनाता है। मुझे लगता है कि हम पहले इतने नस्लभेदी नहीं रहे होंगे। बाजार ने गोरे होने की चाहत को लोगों के अंदर पहले पैदा किया, सिनेमा और टीवी सीरियल्स के माध्यम से। फिर डिमांड को भुनाना शुरु किया। इस तरह ये देश अपनी सच्चाई से कटता गया और नकली जीवन और रंग-रूप के पीछे कुछ ज़्यादा ही भागने लगा।

यह फिल्मों का ही प्रभाव रहा होगा क्योंकि बाद के फिल्मों में ऐसे नस्लभेदी गाने लिखे जाने लगे ‘गोरी हैं कलाइयाँ पहना दे मुझे हरी-हरी चूड़ियां’। गोरे-गोरे मुखड़ों पर काला चश्मा ही क्यों पसंद किया गया या करवाया गया। क्या कभी सांवली या काली कलाइयों के लिये गाना लिखा गया होगा। ऐसे गीत अभी भी लिखे जा रहे। मेेरी चिट्टियाँ कलाइयाँ गाने को ही सुना जा सकता है। जिस पर डांस करते हुये जैक्लीन बहुत इतराती हुयी नज़र आती हैं। भोजपुरी गायक मनोज तिवारी के ही एक गाने को याद करें तो वो कहते हैं कि जॉन बात बा संवरको में उ गोर का करि, जॉन कइ दिही अन्हार ऊ अंजोर का करि। मतलब कि जो बात सांवले रंग में है वह गोरे में कहाँ और जो काम अँधेरा कर सकता है वह रोशनी भी नहीं कर सकती। अपने गीत में वे कृष्ण से लेकर कबीर के साथ बहुत सारे सांवले लोगों का उद्धरण देते हुये तर्क पूर्ण बात करते हैं। जो का़बिले तारीफ है।

हमारे यहाँ काली माँ की पूजा होती है लेकिन लड़की काली है कहकर उसकी शादी कटती ही रहती है। काला रंग तो सर्व व्यापी है और गोरा व्यक्ति भी सुंदर दिखने के लिये काले वस्त्रों का ही सहारा लेता है। बाल का रंग काला बना रहे बुढ़ापे में भी तो लोग डाई लगा लेते हैं। माँ अपने बच्चे को नज़र से बचाने के लिये काले रंग का ही टीका लगाती है।

फिर चेहरे का रंग काला या सांवला है तो उससे दिक्कत क्यों?
Tips By: https://www.facebook.com/Robinhood013

© मोहित कुमार

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