Teachers Day: पुराणिक गुरुओं की जनकारी

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ये हम सब जानते हैं कि हर साल सितंबर महीने की 5 तारीख को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस दिन भारत के उप-राष्टपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन जन्म हुआ था। उनके जन्म के दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। पुराने समय से ही भारत में गुरु और शिष्य की परंपरा चलती आ रही है। पुराने समय से ही भारत में गुरुओं को सबसे ऊंचा स्थान मिला हुआ है यहां तक गुरु का दर्जा भगवान से ऊपर माना गया है। इन पौराणिक गुरु और उनके शिष्यो के बारे में आपको बताते हैं:

1. महर्षि वेदव्यास जी

प्राचीन भारतीय ग्रन्थों के अनुसार महर्षि वेदव्यास को पहले गुरु का दर्जा दिया हुआ है। तभी तो हम गुरु पूर्णिमा वेदव्यास को समर्पित करते है।माना जाता है कि महर्षि वेदव्यास जी भगवान विष्णु के अवतार थे। इनका पूरा नाम कृष्णदै्पायन व्यास था। महर्षि वेदव्यास ने ही वेदों, 18 पुराणों और महाकाव्य महाभारत की रचना की थी। महर्षि के शिष्यों में ऋषि जैमिन, वैशम्पायन, मुनि सुमन्तु, रोमहर्षण आदि शामिल थे।

2. महर्षि वाल्मीकि जी
महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण की रचना की थी। महर्षि वाल्मीकि जी कई तरह के अस्त्र-शस्त्रों के आविष्कारक माने जाते  हैं। भगवान राम और उनके दोनो पुत्र लव-कुश महर्षि वाल्मीकि जी के शिष्य थे। लव-कुश को अस्त्र-शस्त्र चलाने की शिक्षा महर्षि वाल्मीकि जी ने ही दी थी जिससे उन्होंने महाबलि हनुमान को बंधक बना लिया था।

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