केदारनाथ सिंह का जीवन परिचय 💖 Biography of Kedarnath Singh in Hindi

जीवन परिचय (1934-2018)

7 जुलाई 1934 ईस्वी को प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह Kedarnath Singh जी का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिला (Ballia is a city with a municipal board in the Indian state of Uttar Pradesh The city is situated 140 km east of Varanasi and about 380 km from the state capital Lucknow.) के छोटे से गांव चकिया में हुआ था| उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University, formerly Central Hindu College, is a public central university located in Varanasi, Uttar Pradesh.) से हिंदी में स्नातक (Bachelor’s degree ) की उपाधि प्राप्त की| वहीं से आधुनिक हिंदी कविता Hindi Poet में व्यवधान विषय पर Ph.D. (Doctor of Philosophy (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) उपाधि प्राप्त की थोड़े समय के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र में हिंदी के प्रोफेसर बने थे| अंतत उन्होंने अवकाश प्राप्त किया उसके बाद वह दिल्ली में रहकर स्वतंत्र लेखन कर रहे थे|

मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं को केदारनाथ सिंह बड़ी सक्षमता से समझते हैं और अपने काव्य में उनको यथा स्थान दिया गया है केदारनाथ सिंह की कविताओं में शोर-शाराबा न होकर विद्रोह का शांत और संयत का स्वर सशक्त रूप में उभरता है| संकलन जमीन पक रही है| जमीन, रोटी, बैल, आदि उनकी इसी प्रकार की कविताएं हैं| उनकी कविताओं में माननीय संवेदना और विचारों से अनुभव किया जा सकता है|

उपाधियाँ व पुरुष्कार

जीवन के बिना प्रकृति और वस्तुएं कुछ भी नहीं है यह अहसास उन्हें अपनी कविताओं में आदमी के और समीप ले आया है इस प्रक्रिया में केदारनाथ सिंह की भाषा और भी नम्य और पारदर्शी हुई हैं और उनमें एक नयी ऋजुता और बैलोसपन आया है| इनकी कविताओं में रोजमर्रा के जीवन के अनुभव परिचित बिम्बों में बदलती दिखाई देते हैं| शिल्प में बातचीत की सहजता और अपनापन अनायास ही दृष्टि गोचर  होता है| अकाल में सारस कविता संग्रह पर उनको 1989 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से और 1994 में मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान तथा कुमार आशान, व्यास, सम्मान, दयावती, मोदी पुरस्कार आदि अन्य कई सम्मानों भी सम्मानित किया गया है|

रचनाएँ

अभी तक केदारनाथ सिंह के चार काव्य संग्रह प्रकाशित हुए हैं:-

  • अभी बिल्कुल अभी,
  • जमीन पक रही है,
  • यहां से देखो,
  • अकाल में सारस,
  • उत्तर कबीर अन्य कविताएं और बाघ कल्पना और छायावाद है|
  • जीने के लिए कुछ शर्ते
  • प्रक्रिया
  • सूर्य
  • एक प्रेम कविता को पढ़कर
  • आंधी रात

उनकी आलोचनात्मक पुस्तक और मेरे समय के शब्द तथा कब्रिस्तान में पंचायत निबंध संग्रह है कुछ समय पहले ही उनकी चुनी हुई कविताओं का संग्रह प्रतिनिधि कविताएं नाम से प्रकाशित हुआ था ताना-बाना नाम से विभिन्न भारतीय भाषाओं का हिंदी में अनूदित काव्य संग्रह हाल ही में प्रकाशित हुआ था|

बनारस कविता

कवि केदारनाथ की चर्चित कविता बनारस

इस शहर में बसंत अचानक आता है।
और जब आता है तो मैंने देखा है

लहरतारा या मडुवाडीह की तरफ से उठता है
धूल का एक बवंडर और इस महान पुराने शहर की जीभ किरकिराने लगती हैं
जो है वह सुगबुगाता है

जो नहीं है वह फेंकने लगता है पचखियां
आदमी दशाश्वमेघ पर जाता है और पाता है घाट का आखिरी पत्थर
कुछ और मुलायम हो गया है

सीढ़ियों पर बैठे बन्दरों की आँखों में अब अजीब-सी नमी है
और एक अजीब-सी चमक से भर उठा है
भिखारियों के कटोरों का निचाट खालीपन तुमने कभी देखा है


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