शक्तिशाली अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास ☑ History of The powerful Alauddin Khilji In Hindi

अलाउद्दीन खिलजी का परिचय ☑ Introduction of Alauddin Khilji in Hindi

तुर्क मूल के अलाउद्दीन खिलजी Alauddin Khalji मूल नाम अली गुर्शास्प था | वो खिलजी वंश के शिहाबुद्दीन मसूद खिलजी का पुत्र था | अलाउद्दीन को मालिक -छज्जू के विद्रोह के दमन के बाद कड़ा मानिकपुर का सूबेदार बनाया गया | अलाउद्दीन खिलजी द्वारा द्वितीय देवगिरी अभियान में अपार धन-संपत्ति प्रदान की गई, जिसके बाद उसने अपने चाचा का तख़्त पलटने का मन बनाया और 1296 जलालुद्दीन की हत्या के बाद खुद सुल्तान बना गया |

उसके बाद उसने डेल्ही के लाल महल में अपना राजतिलक करवाया | अलाउद्दीन खिलजी पहला मुस्लिम शासक था, जिसने दक्षिण भारत में अपना साम्राज्य फैलाया था, और जीत हासिल की थी | विजय के लिए उनका जुनून ही उन्हें युद्ध में सफलता दिलाता था | जिससे दक्षिण भारत में उनका प्रभाव बढ़ता गया, और उनके साम्राज्य का विस्तार बढ़ता गया | खिलजी की बढ़ती ताकत के साथ, उनके वफादारों की भी संख्या बढ़ती गई | खिलजी के साम्राज्य में उनके सबसे अधिक वफादार जनरल थे मलिक काफूर और खुश्रव खान |

history of alauddin khilji
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दक्षिण भारत में खिलजी का बहुत आतंक था, वहां के राज्यों में ये लूट मचाया करते थे, और वहां के जो शासक इनसे हार जाते थे, उनसे खिलजी वार्षिक कर लिया करते थे | अलाउद्दीन का जन्म 1250 में बंगाल के बीरभूम (Birbhumm) जिले में हुआ था, उनका नाम जुना मोहम्मद खिलजी रखा गया था. इनके पिता शाहिबुद्दीन मसूद थे, जो खिलजी राजवंश के पहले सुल्तान जलालुद्दीन फिरुज खिलजी के भाई थे. बचपन से ही अलाउद्दीन को अच्छी शिक्षा नहीं मिली थी, लेकिन वे शक्तिशाली और महान योध्या बनके सामने आये |

सुलतान बनने के बाद उसकी चुनौतिया ☑ After becoming A King’s Difficult in Hindi

  • अलाउद्दीन खिलजी के सुल्तान बनने के बाद उसके समक्ष कई तरह की कठिनाइया आई थी |
  • जलालुद्दीन को मरने के बाद उसे प्रजा की घृणा का सामना करना पड़ा | कई सारे जलाली सरदार उससे असंतुष्ट थे |
  • उसके समक्ष मंगोल एक समस्या थे | और पंजाब में खोक्ख्रो का विद्रोह चालु था | कई स्वतंत्रा पडोसी राज्य सल्तनत की सत्ता को चुनौती दे रहे थे |
  • ऐसी स्थिति में में शासन को सही प्रकार से चलाना और सल्तनत के प्रति सम्मान प्रकट करना अलाउद्दीन की लिए ज़रूरी था |
  • उसने सुल्तान बनने के बाद सबसे पहले अर्कली खां के साथ -साथ उसके परिवार का कत्ले -आम किया |
  • 1307 में खिलजी ने अपने वफादार काफूर को देवगिरी में राजा से कर लेने के लिए भेजा |
  • 1308 में खिलजी ने मंगोल ने राज्य अफगानिस्तान में अपने मुख्य घाजी मलिक के साथ अन्य आदमी कंधार, घजनी और काबुल को भेजा | घाज़ी ने मंगोलों को ऐसा कुचला की वे फिर भारत पर आक्रमण करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए |
  • 1310 में खिलजी ने होयसल सामराज्य, को कृष्णा नदी के दक्षिण में स्थित था, में बड़ी आसानी से सफलता प्राप्त कर ली. वहां के शासक वीरा बल्लाला ने बिना युद्ध के आत्मसमर्पण कर दिया और वार्षिक कर देने को राजी हो गए |
  • 1311 में मबार इलाके में मलिक काफूर के कहने पर अलाउद्दीन की सेना ने छापा मारा, लेकिन वहां के तमिल शासक विक्रम पंड्या के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा |
  • काफूर भारी धन और सल्तनत लूटने में कामयाब रहे. उत्तर भारतीय राज्य प्रत्यक्ष सुल्तान शाही के नियम के तहत नियंत्रित किये गए,  वहीं दक्षिण भारत में सभी प्रदेश प्रतिवर्ष भारी करों का भुगतान किया करते थे,  जिससे खिलजी के पास अपार पैसा हो गया था |
  • खिलजी ने कृषि उपज पर 50% कर माफ़ कर दिया, जिससे किसानों पर बोझ कम हो गया और वे कर के रूप में अपनी जमीन किसी को देने के लिए बाध्य नहीं रहे |

शक्तिशाली अलाउद्दीन खिलजी की उपलब्धियां ☑ The powerful Alauddin Khilji’s Achivements

  1. अलाउद्दीन खिलजी ने मूल्य नियंत्रण नीति लागु की, जिसके तहत अनाज, कपड़े, दवाई,  पशु,  घोड़े,  आदि निर्धारित मूल्य (Fixed Price) पर ही बेचे जा सकते थे | मूल रूप से सभी वस्तुओं का मूल्य कम ही था, जो दिल्ली के बाजारों में बेचीं जाती थी | इसका सबसे अधिक फायदा नागरिकों और सैनिकों को होता था |
  2. दक्षिण भारत के हिस्सों में काफूर ने विजय प्राप्त की, तब वहां उसने मस्जिद बनवाई | ये अलाउद्दीन के बढे हुए सामराज्य को बतलाता था, जो उत्तर भारत के हिमालय से दक्षिण के आदम पुल तक फैला हुआ था |

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु ☑ Alauddin Khilji Death

शक्तिशाली अलाउद्दीन खिलजी की 1316 में 66 साल की उम्र में मृत्यु हो गई थी | वैसे यह माना जाता है कि उनके लेफ्टिनेंट मलिक नायब ने उनकी हत्या की थी | उनकी कब्र और मदरसे दिल्ली के महरौली में क़ुतुब काम्प्लेक्स के पीछे है |

 

 

 


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