जब बच्चे 5 साल के हो जाएँ तो उन्हें कैसे संभालें और उनकी देखभाल कैसे करें ?
जब बच्चे 5 साल के हो जाते हैं, तो वे सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर रहे होते हैं। वे अब छोटे बच्चे नहीं रहे, जो पूरी तरह आप पर निर्भर हों। अब वे अपने आस-पास की दुनिया को समझने लगे हैं, उनमें जिज्ञासा बढ़ गई है, और वे अपनी पहचान बनाना सीख रहे हैं। एक माता-पिता के रूप में, यह आपके लिए एक रोमांचक लेकिन चुनौतीपूर्ण समय हो सकता है। उन्हें सही ढंग से संभालने और उनकी देखभाल करने के लिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा।
1. उनकी स्वतंत्रता और जिज्ञासा का सम्मान करें
5 साल की उम्र में बच्चे बहुत जिज्ञासु होते हैं और हर चीज़ के बारे में सवाल पूछते हैं। यह उनकी सीखने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सवालों का धैर्यपूर्वक जवाब दें:
उनके सवालों से चिढ़ने या उन्हें टालने के बजाय, धैर्य के साथ उनके हर सवाल का जवाब दें। अगर आपको किसी सवाल का जवाब नहीं पता है, तो आप साथ मिलकर उसका पता लगा सकते हैं। इससे उन्हें लगेगा कि आप उनकी जिज्ञासा को महत्व देते हैं।
उन्हें खुद काम करने दें:
अब वे अपने छोटे-मोटे काम खुद कर सकते हैं, जैसे कि कपड़े पहनना, अपने खिलौने समेटना, या जूते पहनना। उन्हें ये काम खुद करने दें, भले ही इसमें थोड़ा ज़्यादा समय लगे। इससे उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ती है। अगर वे गलती करते हैं, तो उन्हें डांटने के बजाय बताएं कि अगली बार वे इसे कैसे बेहतर कर सकते हैं।
नए अनुभव दें:
उन्हें नए-नए खेल खेलने, कहानियाँ पढ़ने, और कला या संगीत जैसी गतिविधियों में शामिल होने का मौका दें। इससे उनकी रचनात्मकता बढ़ती है।
2. उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें व्यक्त करने में मदद करें
5 साल के बच्चे कई तरह की भावनाओं से गुज़रते हैं। वे कभी बहुत खुश होते हैं, तो कभी नाराज़, उदास या डरे हुए भी हो सकते हैं।
उनकी भावनाओं को स्वीकार करें:
जब वे नाराज़ या उदास हों, तो यह न कहें कि “इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो?” या “रोना बंद करो।” इसके बजाय, उनसे कहें, “मुझे पता है कि तुम नाराज़ हो। चलो, बात करते हैं कि क्या हुआ।”
भावनाओं को नाम देना सिखाएं:
उन्हें बताएं कि वे जो महसूस कर रहे हैं, उसे क्या कहते हैं। जैसे, “जब तुम्हारा खिलौना टूट गया, तो तुम्हें दुख हुआ, है ना?” इससे वे अपनी भावनाओं को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे।
सही तरीके से व्यक्त करना सिखाएं:
उन्हें यह सिखाना ज़रूरी है कि गुस्सा करना या नाराज़ होना ठीक है, लेकिन दूसरों को मारना या चीज़ें तोड़ना ठीक नहीं है। आप उन्हें गुस्से को नियंत्रित करने के तरीके सिखा सकते हैं, जैसे कि गहरी साँस लेना या किसी शांत जगह पर थोड़ी देर बैठना।
3. सकारात्मक अनुशासन का उपयोग करें
इस उम्र में बच्चे अपनी सीमाओं को परखना शुरू कर देते हैं। इसलिए, अनुशासन बहुत ज़रूरी हो जाता है, लेकिन यह सज़ा देने वाला नहीं, बल्कि सिखाने वाला होना चाहिए।
नियम स्पष्ट करें:
घर के नियम स्पष्ट और सीधे होने चाहिए। उन्हें बताएं कि कौन सी चीज़ें स्वीकार्य हैं और कौन सी नहीं। जैसे, “हम दूसरों को नहीं मारते हैं,” या “जब आप खेलना खत्म कर लें, तो खिलौनों को वापस रखना चाहिए।”
परिणामों को समझाएं:
जब वे कोई नियम तोड़ते हैं, तो उन्हें बताएं कि इसका क्या परिणाम होगा। यह परिणाम सीधा और उनके व्यवहार से जुड़ा हुआ होना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर वे खिलौने नहीं समेटते, तो उन्हें थोड़ी देर के लिए उस खिलौने से खेलने को न दें।
सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करें:
जब वे अच्छा व्यवहार करें, तो उनकी तारीफ़ ज़रूर करें। कहें, “तुमने अपने खिलौने कितनी अच्छी तरह से समेटे हैं। मुझे तुम पर गर्व है।” इससे वे उस व्यवहार को दोहराने के लिए प्रेरित होंगे।
4. सीखने और विकास को बढ़ावा दें
5 साल की उम्र सीखने के लिए सबसे अच्छी होती है। आप उन्हें खेल-खेल में कई चीज़ें सिखा सकते हैं।
पठन-पाठन को मज़ेदार बनाएं:
उन्हें रोज़ कहानियाँ पढ़कर सुनाएं। इससे उनकी शब्दावली बढ़ती है और उनकी कल्पना शक्ति भी। उन्हें अक्षरों और शब्दों से परिचित कराएं।
गणित को रोज़मर्रा की चीज़ों से जोड़ें:
जब आप बाज़ार जा रहे हों, तो उन्हें फलों को गिनने के लिए कहें। जब आप खाना बना रहे हों, तो उन्हें सामग्री को मापने में मदद करने के लिए कहें।
रचनात्मकता को बढ़ावा दें:
उन्हें पेंटिंग, ड्राइंग, मिट्टी से खेलने या अन्य कला गतिविधियों में शामिल होने दें। इससे उनकी रचनात्मकता और मोटर कौशल का विकास होता है।
5. सामाजिक कौशल सिखाएं
इस उम्र में बच्चे स्कूल जाना शुरू कर देते हैं और दोस्तों के साथ ज़्यादा समय बिताते हैं। इसलिए, उन्हें सामाजिक कौशल सिखाना बहुत ज़रूरी है।
साझा करना और बारी का इंतज़ार करना सिखाएं:
उन्हें बताएं कि दूसरों के साथ चीज़ें साझा करना और खेल में अपनी बारी का इंतज़ार करना क्यों ज़रूरी है।
दूसरों के प्रति दयालु होना सिखाएं:
उन्हें बताएं कि दूसरों के साथ दयालुता से पेश आना क्यों ज़रूरी है। आप उदाहरण देकर समझा सकते हैं, “अगर आपका दोस्त उदास है, तो आप उससे पूछ सकते हैं कि क्या हुआ।”
विवादों को हल करना सिखाएं:
जब वे किसी दोस्त के साथ लड़ें, तो उन्हें डांटने के बजाय बताएं कि वे अपनी समस्या को कैसे सुलझा सकते हैं।
6. माता-पिता के रूप में अपना ख्याल रखें
यह सब करते हुए, यह न भूलें कि आप भी एक इंसान हैं और आपको भी आराम की ज़रूरत है।
अपने लिए समय निकालें:
बच्चों की देखभाल में आप इतने व्यस्त हो सकते हैं कि खुद को भूल जाएँ। इसलिए, रोज़ कुछ मिनट अपने लिए ज़रूर निकालें।
मदद मांगें:
अगर आप थकान महसूस कर रहे हैं, तो अपने जीवनसाथी या किसी दोस्त से मदद मांगने में संकोच न करें।
धैर्य रखें:
कभी-कभी आप भी थक सकते हैं और ग़लतियाँ कर सकते हैं। यह ठीक है। बस अगली बार बेहतर करने की कोशिश करें।
5 साल की उम्र में बच्चे एक अद्भुत बदलाव से गुज़र रहे होते हैं। एक माता-पिता के रूप में, यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप उन्हें एक सुरक्षित, प्यार भरा और समझने वाला माहौल दें ताकि वे एक आत्मविश्वासी और संतुलित व्यक्ति के रूप में विकसित हो सकें। यह समय चुनौतीपूर्ण ज़रूर है, लेकिन यह आपके और आपके बच्चे के बीच के रिश्ते को और भी मज़बूत बनाने का एक बेहतरीन मौका है।
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