भारत की बहू और बेटियों के क्या हैं मौलिक संपत्ति अधिकार Indian daughters-in-law and daughters have fundamental rights

आप क्या जानेंगे -

अधिकार से वंचित Deprived of rights

भारत में (in India) जब भी संपत्ति में हिस्सा बांटने (sharing) की बात आती है, तो बेटी और बहू अलग-अलग कानूनों द्वारा शासित होती हैं। साथ ही अपने स्वयं के दायरे में रहकर अपने अधिकारों (The rights) का आनंद लेती है। उत्तराधिकार और उत्तराधिकारी द्वरा संपत्ति के विभाजन को नियंत्रित (Controlled) करने वाले विभिन्न मानदंडो (The criteria) के बारे में जानने के लिए, चलिए थोड़ी जानकारी अर्जित (Earned) करते है भारत में ऐसे बहुत से मामले देखने को मिलते हैं, जहां बेटी और बहुओं (Daughter-in-law) को उनकी पैतृक संपत्ति के अधिकार से वंचित कर दिया गया हो। दरअसल (Actually), यह बहुत कम लोगों को ज्ञात होता है कि घर की महिलाओं को भी, पुरुषों की तरह ही संपत्ति में (In the same property as men) अपने हिस्से का दावा (Claim) करने का अधिकार है या होता है। लेकिन, हस्तांतरित (Transferred) संपत्ति का हिस्सा बेटी और बहू के बीच काफी भिन्न (Different) होता या हो सकता है।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम Hindu Succession Act

2005 में, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में कुछ संशोधन किए गए थे। जिसके अनुसार बेटियों को संपत्ति में वारिस या हम वारिस के समान अधिकार की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस मामले में अस्पष्टता (Ambiguity) थी, क्योंकि संशोधन (an amendment), घोषणा (Declaration) के दिन से किया गया था। जिसके तहत 2005 से पहले के मामलों पर विचार (Consider matters) नहीं किया गया था। उसके बाद 11 अगस्त, 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसले पर साफगोई दिखाते हुए, एक उम्दा फैसला सुनाया, कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पिता की संपत्ति में बेटियों को भी बेटों के बराबर ही अधिकार प्राप्त हैं।

महिला के कानूनी अधिकार : Woman’s legal rights

भले ही संशोधन आए दिन हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट कहता है कि एक बेटी को अपने सहस्राब्दि (Millennium) अधिकार जन्म के साथ ही प्राप्त करती है। इस प्रकार, अधिनियम के तहत, यह सभी नियम उस समय भी लागू होंगे, जब पिता जीवित नहीं था या हो ! यानी 2005 में। इसके अलावा बेटी की शादी से उसके यह अधिकार प्रभावित (influenced) नहीं होंगे। यानी पिता की संपत्ति पर बेटी के हक के मामले में बेटी विवाहित है या नहीं, इस बात का कोई असर नहीं होगा।

कानून जो भारत में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए : Laws made to protect the rights of women in India

एक वारिस के रूप में बेटी जन्म के बाद से एक अविभाजित परिवार (Undivided family) में, संपत्ति में समान अधिकार साझा करती है। इसके अलावा बेटी को अपने वैवाहिक जीवन (married life) की स्थिति ‘विवाहित, अविवाहित अथवा विधवा (Single or widow)’ की परवाह किए बिना या बावजूद (Despite), संपत्ति में अधिकारी बनी रहती है और कभी भी बंटवारे अथवा हिस्से की मांग कर सकती है। बताते हैं रेड्डी एंड रेड्डी लाॅ फर्म के एडवोकेट सुधीर रेड्डी। मृत बेटी के मामले में, उसके बच्चे, उस हिस्से/संपत्ति के हकदार होंगे,बनेंगे। जो उसने यानी बेटी ने विभाजन के समय प्राप्त (Get time) की थी। जब वह विभाजन के वक्त जीवित थी। यदि विभाजन के दिन उसका कोई भी बच्चा जीवित नहीं है, तो उसके पोते-पोती (Grandchildren) उस हिस्से को प्राप्त करने के पात्र (character) होंगे।

पुत्री के रूप में एक बेटी के संपत्ति अधिकार क्या हैं? What are the property rights of a daughter as a coparcener?

1.जनम के साथ हिंदू अविभाजित परिवार यानी पैतृक संपत्ति (Ancestral property) पर पूरा अधिकार।
2.हिन्दू अविभाजित परिवार यानी एचयूएफ संपत्ति में विभाजन की मांग का अधिकार
3.अगर वह घर की सबसे बड़ी सहकर्मी (fellow employee) है, तो कर्ता बनो।
4.यदि वह अंत्येष्टि (Funerals) के लिए अपने कानूनी उत्तराधिकारियों को एचयूएफ संपत्ति (Property) में अपने हिस्से के उत्तराधिकार का अधिकार देती है।

बहू के संपत्ति अधिकार क्या हैं? What are the property rights of a Daughter-in-Law?

एचयूएफ बहू को एचयूएफ के सदस्य (Member) का दर्जा तो देता है, लेकिन उसे उत्तराधिकारी/वारिस नहीं बनाता। बहू एचयूएफ संपत्ति में अपने पति के हिस्से के माध्यम (medium) से संपत्ति का अधिकार प्राप्त करती है/कर सकती हैं। ‘या तो पति उसे स्वयं अपनी मर्जी से दे दे या पति के निधन के बाद उसे प्राप्त होगा।’
बहू उस संपत्ति पर किसी भी अधिकार का दावा (Claim right) नहीं कर सकती है, जो विशेष रूप से उसके ससुराल वालों की है। न ही, ऐसी संपत्ति को साझा संपत्ति के रूप में माना जाएगा। यदि सास की मृत्यु हो गई हो, तो उसका हिस्सा उसके बच्चों के बीच समान रूप विभाजित (Evenly divided) होगा। बहू को सिर्फ अपने पति के हिस्से पर अधिकार हासिल होगा।

स्व-अर्जित संपत्ति के मामले में बेटी के अधिकार क्या हैं? What are the property rights of the daughter regarding self-acquired property?

पिता या माता की स्व-अर्जित संपत्ति के मामले में, उनके बेटे या बेटी का इस पर कोई जन्मसिद्ध (Birth-date) अधिकार नहीं होता है। यदि पिता या माता की मृत्यु (death) हो जाती है, तो संपत्ति का विभाजन (division) हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Act), 1956 के नियमों के अनुसार ही होता है। जिसके तहत बेटी को प्रथम श्रेणी (First class) की वारिस के रूप ‘कवर’ किया जाता है, और बेटे या दूसरे उत्तराधिकारियों की ही तरह एक समान कानूनी अधिकार प्राप्त होता है। सुधीर स्पष्ट करते हैं।’

स्व-अर्जित संपत्ति के बारे में बहू के अधिकार क्या हैं? What are the Property rights of the daughter-in-law regarding self-acquired property?

बहुओं का ससुराल वालों की स्व-अर्जित (Self earned) संपत्ति पर अधिकार नहीं है या होता। वह अपने पति के हिस्से के माध्यम (Through part) से ही ससुराल की संपत्ति (Property in laws) पर अधिकार प्राप्त कर सकती है या करती है।

पैतृक संपत्ति के बारे में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 क्या कहता है? What does the Hindu succession Act,1956 state about Ancestral Property?

2005 के हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के संशोधन के अनुसार, अधिनियम की धारा 6 ‘1’ में बेटी को हिंदू अविभाजित परिवार में कोपार्सिनर/ हम वारिस (heir) की भूमिका दी गई है। ब्लैक लाॅ डिक्शनरी कोपार्सिनर को एक ऐसे व्यक्ति (Personal) के रूप में परिभाषित (Defined) करता है, जिसके पास संयुक्त (Joint) रूप से एक संपत्ति है, और जो उसे पूरी संपत्ति के रूप में रखता है। यानी एक व्यक्ति जो वंश के परिणामस्वरूप (As a result of descent) एक समवर्ती (Concurrent) होलसोल, मालिक बन गया है।


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