होली में बनाइए आलू के पापड़ इस लाजवाब तरीके से 🍟 Make potato papad in Holi in this wonderful way
रंगों का त्योहार होली 🍟 Holi festival of colors
देश भर में धूम-धाम से मनाई जाने वाली और हिन्दुओं के चार बहुत ही बड़े पर्वों (Feast) में से एक है होली का ये पावन (Holy) त्यौहार। यह त्यौहार फाल्गुनी पूर्णिमा को होलिका दहन (Combustion) के बाद धूमधाम से मनाया जाता है। वसन्त ऋतु वैसे भी ऋतुराज के नाम से जानी जाती है। इसी प्रकार फाल्गुन का महीना (Month of March) भी अपने मादक सौन्दर्य (Intoxicating beauty) तथा वासन्ती पवन से लोगों को हर्षित (Joyful) करता है। हमारा प्रत्येक (Everyone) पर्व किसी-न-किसी प्राचीन घटना से जुड़ा हुआ है। होली के पीछे भी एक ऐसी ही प्राचीन घटना (Ancient event) है जो आज से कई लाख वर्ष पहले सतयुग में घटित हुई थी।
होली के पीछे एक प्राचीन घटना 🍟 An ancient event behind Holi
सतयुग यानी की उस समय हिरण्यकश्यप (Hiranyakashyap) नाम का एक दैत्यराजा आर्यावर्त में राज्य करता था। वह स्वयं को परमात्मा कहकर अपनी प्रजा से कहता था कि वह केवल उसी की पूजा (prayer) करें। निरुपाय प्रजा क्या करती, डर कर उसी की उपासना (Worship) करती। उसका पुत्र प्रह्लाद, जिसे कभी नारद ने आकर विष्णु का मंत्र जपने की प्रेरणा (Inspiration) दी थी, वही अपने पिता की राय न मानकर रामनाम का जप करता था। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’, उसका प्रिय मंत्र था।

राजाज्ञा की अवहेलना 🍟 Disobedience of the decree
अपने पुत्र के द्वारा की जाने वाली राजाज्ञा की यह अवहेलना हिरण्यकश्यप से सहन न हुई और वह अपने पुत्र को मरवाने के लिए नाना प्रकार के कुचक्र (Various types of vicious cycle) रचने लगा। कहते हैं जब प्रह्लाद किसी प्रकार भी उसके काबू में नहीं आया तो एक दिन उसकी बहन होलिका, जो आग में जल नहीं सकती थी, अपने भतीजे प्रह्लाद को लेकर जलती आग में कूद गई। किन्तु प्रह्लाद का बाल-बाँका नहीं हुआ और होलिका भयावह (Frightening) आग में जलकर राख हो गई। इस प्रकार होली एक भगवद्भक्त की रक्षा की स्मृति (Memory of defense) में प्रतिवर्ष मनाई जाने लगी। होली पूजन वस्तुतः अग्निपूजन है जिसके पीछे भावना यह होती है कि हे अग्नि देव! जिस प्रकार आपने निर्दोष (Innocent) प्रह्लाद को कष्टों से उबारा (Recover from troubles), उसी प्रकार आप, हम सबकी दुष्टों से रक्षा करें, प्रसन्न हों। होली सामाजिक तथा विशुद्ध (Social and pure) रूप से हिन्दुओं का त्योहार है किन्तु ऐसे प्रमाण (proof) मिलते हैं जिनसे पता चलता है कि मुसलमान शासक भी इस रंगांरग त्योहार (Colorful festival) को धूमधाम से मनाते थे। लखनऊ (Lucknow) में वाजिद अली शाह का नाम ऐसे शासकों (The rulers) में अग्रणी माना जाता है। वे कृष्ण पर कविता करते, होली लिखते तथा होली के अवसर पर कैसर बाग में नाच-गाने की व्यवस्था कराते थे। वाजिद अली, हिन्दू-मुसलमानों के बीच (Between hindu-muslims) स्नेह और प्यार को प्रोत्साहन देने वाले (Affectionate and affectionate) एक बहुत अच्छे शासक थे। होली का शहरों में स्वरूप गांवों से थोड़ा भिन्न होता है। कुछ शहरों में तो होली मनाने का तरीका अभद्रता की सीमा पार कर जाता है जिसे रोका जाना जरूरी है। होली के अवसर पर कुछ लोग ज्यादा मस्ती में आ जाते हैं। वे मादक द्रव्यों का सेवन करके ऐसी हरकतें करते हैं जिनको कोई सभ्य समाज क्षमा नहीं (Not forgive) कर सकता।
चाट, पोकोडे, मिठाई, गुजिया और कई तरह के पापड़ बनाते हैं 🍟 Makes chaat, pokodas, sweets, gujiyas and a variety of papad
होली के इस पावन अवसर पर लोग खुद चाट पोकोडे मिठाई गुजिया और तरह -तरह के पापड़ बनाते हैं और इसका आनंद लेते हैं क्युकी इस मौसम में तेज धूप (Strong sunshine) आलू के पापड़ बानाने के लिए बहुत ही अच्छी होती है। बेस्ट बात तो यह है कि इस मौमस (weather) में आलू भी खूब अच्छे से पक जाते हैं। बाजार में भी आलू सस्ते और अच्छे मिलने लगते हैं। इन आलुओं से पापड़ तैयार (ready) किए जा सकते हैं और उन्हें साल भर आप घर में ही प्रिजर्व करके रख सकती हैं। वैसे कुछ महिलाएं (Women) घर पर पापड़ बनाने की जगह बाजार से पापड़ मंगवाना (Order) ज्यादा आसान (easy) समझती हैं। हालाकि यह आसान हैं भी क्योंकि इसमें कोई मेहनत (hard work) तो करनी नहीं पड़ी बस पैसे ही खर्च होते है। मगर, जो स्वाद आपको घर के पापड़ों में मिलेगा वह आपको बाजार के पापड़ों में नहीं मिलेगा। साथ ही बाजार (market) के पापड़ बहुत ज्यादा मोटे होते हैं और मशीन के बने हुए होते हैं वहीं घर के पापड़ पतले होते हैं और हाथ से बने होते हैं। चलिए हम आपको घर पर ही आसान तरीके से पापड़ बनाने की विधि बताते हैं।
आलू के पापड़ की विधि 🍟 Potato Papad Recipe
सामग्री ingredients
1 किलोग्राम आलू (potato)
नमक स्वादानुसार
1/2 चम्मच लाल मिर्च (Red chilly)
2 बड़ा चम्मच तेल (oil)
विधि Method
- सबसे पहले आपको आलू को साफ पानी (Clean water) से धोना है और उसे उबालने के लिए रख देना है। ध्यान रखें आलू को ज्यादा गीला न होने दें। उसे उतना ही उबालें कि उसका भर्ता बन सके।
- जब आलू उबल जाएं तो उसे कुछ देर ठंडा होने के लिए रख दें और जब वह ठंडा हो जाए तो उसका छलिका उतार (Peel off) दें। इसके बाद आलू को कद्दूकस (Grate) करें और उसका भर्ता बना लें।
- आलू के भर्ते में नमक और लाल मिर्च डालें। अगर आप जीरा और धनिया पत्ती डालना (Coriander leaves) चाहें तो वह भी आप आलू के पापड़ में डाल सकती हैं। इससे आलू के पापड़ का स्वाद और भी अच्छा हो जाता है।
- अब हाथ में थोड़ा सा तेल लगाएं और आलू को अच्छे से गूथें। आलू को गूथ (mashed potato) कर उसके उपरसे थोड़ा तेल लगाएं। अब इसमें से छोटी-छोटी लोई बना कर अलग रख लें।
- अब इन लोइयों को एक मोटी पारदर्शक (Thick translucent) पोलीथिन के बीच में रखें और उपर से एक और मोटी पारदर्शक पोलीथिन लगाएं। इसके बाद आपको एक प्लेट से लोई को दबाना (suppress) है और फिर हाथ से फैलाना है।
- पापड़ जब गोल बन जाए तो उसे धूप में फैली एक पॉलिथिन पर सुखा दें। पापड़ो के बीच में दूरी रखें। जब पापड़ एक तरफ से सूख जाए तो उसे दूसरी तरफ पलट दें।
- आपके पापड़ शाम तक सूख (Dried) जाएंगे मगर, आपको 2 दिन इन्हें धूप दिखानी चाहिए (Sun should show) ताकि यह थोड़े भी गीले न रह जाएं। इसके बाद आप इन्हें एअर टाइड डिब्बे (Air tight box) में रखें और जब मन करे तल कर या सेक कर खाएं।
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