मीठे खाने की क्रेविंग कब होती है – When does the craving for sweet food occur ?

मीठा खाने से डायबिटीज और मोटापे जैसी अधिक समस्‍याओं/ More problems का रिस्‍क बढ़ता है, ये सोचकर अब लोगों ने नया तरीका निकाल लिया है| वे मीठे के तौर पर चीनी की जगह शुगर फ्री/ Sugar free का इस्‍तेमाल करने लगे हैं|ऐसे लोगों को हाल ही में World Health Organization ने सावधान किया है| कुछ लोग मीठा खाने के बहुत शौकीन/ Fond of sweets होते हैं| उन्‍हें कभी भी और किसी भी समय पर मीठा खिला दीजिए वो मना नहीं करेंगे| चूंकि मीठा खाने से डायबिटीज और मोटापे जैसी तमाम समस्‍याओं का रिस्‍क बढ़ता है, ये सोचकर अब लोगों ने नया तरीका/ New way निकाल लिया है| वे मीठे के तौर पर चीनी की जगह शुगर फ्री का इस्‍तेमाल/ Use of sugar free करने लगे हैं, ताकि मीठे का शौक भी पूरा हो जाए और किसी तरह की समस्‍या भी न हो| ऐसे लोगों को हाल ही में World Health Organization (WHO) ने सावधान किया है|

कई लोग चॉकलेट या मिठाई का डिब्‍बा देख कर अपनी जुबान पर कंट्रोल नहीं कर पाते। वहीं कुछ लोगों को रात में डिनर करने के बाद मीठा खाए बिना नींद ही नहीं आती। मीठा खाने की आदत को शुगर क्रेविंग / Sugar Craving कहते हैं जो बिना मौका देखे कभी भी इंसान पर हावी हो जाती है। लेकिन जब आप बिना मतलब चीनी का सेवन करने लगते हैं तो धीरे धीरे यह आपके शरीर पर नेगेटिव इंपैक्‍ट छोड़ने लगती है। जरूरत से ज्‍यादा शुगर खाने पर मोटापा, डायबिटीज, ब्‍लड प्रेशर और‍ डिप्रेशन जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। यदि आपको भी बार बार मीठा खाने की इच्‍छा होती है तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं|

नींद की कमी / Lack of sleep

जो लोग रातभर जागते हैं या जिनकी नींद पूरी नहीं होती उनके शरीर में जब ऊर्जा की कमी होती है तब उन्‍हें जंक फूड या मीठी चीजें खाने का मन करता है। खराब नींद हमारे हार्मोन्‍स को प्रभावित करती है। जिसकी वजह से हमें बार-बार भूख लगती है और शुगर क्रेविंग होती है।

​लो ब्‍लड शुगर / Low blood sugar

हमारा शरीर जब भूखा होता है तब उसे अधिक ईंधन या फ्यूल की आवश्‍यकता पड़ती है। जब आप कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन खाते हैं, तो पाचन तंत्र उसे शुगर में तोड़ देता है। जो उसे रक्‍त के जरिए कोशिकाओं में ले जाकर एनर्जी में बदलता है। जब हमें बिना खाए पिए एक लंबा समय बीत जाता है तब हमारी कोशिकाओं को फ्यूल यानी ईंधन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में हमें अधिक कार्बोहाइड्रेट लेने की आवश्यकता पड़ती है जिस कारण हमें शुगर क्रेविंग होने लगती है।

स्‍ट्रेस हार्मोन / Stress hormone

शरीर जब स्‍ट्रेस में होता है तब कोर्टिसोल और एड्रेनालिन हार्मोन ज्‍यादा बनने लगते हैं। ये दोनों हमारी बॉडी में असंतुलन पैदा करते हैं जिससे ब्‍लड प्रेशर और इंसुलिन का स्तर बढ़ाता है। यही नहीं इससे हमें मीठा खाने की भी क्रेविंग होने लगती है।

मीठा खाने की लत / Sweet tooth addiction

कई लोगों को चीनी की तलब बहुत ज्‍यादा होती है। यह उनके लिए एक नशीले पदार्थ की तरह होता है जिसे वह चाह कर भी नहीं छोड़ पाते। महिलाओं को 6 चम्‍मच तो वहीं पुरुषों को 9 चम्‍मच चीनी तक सीमित रखने की सलाह दी जाती है।

कड़ी डायटिंग / Strict dieting

कई लोग मोटापा कम करने के चक्‍कर में खुद को भूखा रखकर कड़ी डायटिंग करते हैं। जिस वजह से उनके शरीर को पूरा पोषक तत्‍व नहीं मिल पाता। मगर शरीर को हेल्‍द फैट और प्रोटीन की जरूरत पड़ती है, जिससे वह ब्‍लड शुगर को नियंत्रित रख सके। शरीर में ग्लूकोज का स्तर बिगड़ने पर आपको चॉकलेट या मिठाई खाने की क्रेविंग होनी शुरू हो जाती है।

भावनात्मक कारण / Emotional reasons

अगर कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से स्वस्थ नहीं है, तो इसके कारण भी उसे मीठे की क्रेविंग हो सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक तनाव, चिंता, ऊब होना और अन्य भावनात्मक स्थितियों के कारण चीनी की लालसा बढ़ सकती हैं, जो इमोशनल ईटिंग का कारण भी बन सकता है। इसलिए अपनी भावनाओं को हमेशा कंट्रोल में रखने की कोशिश करें।


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