BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC की जगह देश में आज से लागू हुए 3 नए आपराधिक कानूनों में क्या खास है? 20 पॉइंट में समझें

BNS, BNSS, BSA, IPC, CrPC की जगह देश में आज से लागू हुए 3 नए आपराधिक कानूनों में क्या खास है? 20 पॉइंट में समझें

3 नए आपराधिक कानूनों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। ये कानून हैं:

  1. भारतीय न्याय संहिता (BNS),
  2. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS),
  3. और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA),

जो क्रमशः IPC, CrPC, और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह लेते हैं।

तीन नए आपराधिक कानूनों की 20 खास बातें

भारतीय न्याय संहिता (BNS) – IPC का स्थान

  1. राजद्रोह समाप्त, नया अपराध शामिल: राजद्रोह (Sedition) के अपराध को समाप्त कर दिया गया है, लेकिन इसकी जगह ‘भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्य’ नामक नया और व्यापक अपराध जोड़ा गया है।
  2. मॉब लिंचिंग पर कड़ा दंड: मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) को एक अलग अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके लिए मृत्युदंड तक की सज़ा का प्रावधान है।
  3. सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) पर कठोर सज़ा: सामूहिक दुष्कर्म के सभी मामलों में न्यूनतम सज़ा 20 साल के कारावास या शेष जीवन के लिए कारावास तक बढ़ा दी गई है।
  4. विवाहित होने का झांसा देकर संबंध: शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाना अब एक विशिष्ट अपराध है, जिसे दुष्कर्म की परिभाषा से अलग रखा गया है।
  5. छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा (Community Service): छोटे-मोटे अपराधों के लिए जुर्माने के बदले सामुदायिक सेवा (जैसे निःशुल्क श्रम) को सजा के रूप में पेश किया गया है।
  6. हत्या की धाराओं में बदलाव: पहले IPC में 511 धाराएं थीं, जबकि BNS में अब 358 धाराएं हैं।
  7. नए अपराधों का समावेश: संगठित अपराध, आतंकवाद और ‘स्नैचिंग’ (छीन-झपट) जैसे 21 नए अपराधों को BNS में शामिल किया गया है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) – CrPC का स्थान

  1. जीरो FIR: किसी भी अपराध के लिए किसी भी पुलिस स्टेशन में जीरो FIR दर्ज करने की सुविधा प्रदान की गई है, भले ही अपराध उनके अधिकार क्षेत्र में न हुआ हो।
  2. इलेक्ट्रॉनिक FIR: BNSS में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से (ऑनलाइन) FIR दर्ज करने का प्रावधान शामिल है।
  3. फरार अपराधी की अनुपस्थिति में ट्रायल: भगोड़े (Proclaimed Offender) घोषित किए गए अपराधियों की गैर-मौजूदगी में भी न्यायिक ट्रायल (सुनवाई) शुरू करने की अनुमति दी गई है।
  4. पुलिस हिरासत की अवधि में वृद्धि: कुछ विशेष मामलों में पुलिस हिरासत की अवधि को CrPC के 15 दिन से बढ़ाकर 60 से 90 दिन तक किया जा सकता है, जिससे गंभीर मामलों की जांच के लिए अधिक समय मिल सके।
  5. पीड़ित को सुनवाई का अधिकार: पीड़ित को सुनवाई के हर चरण में शामिल होने और अपनी बात रखने का अधिकार दिया गया है।
  6. फैसले की समय-सीमा: कोर्ट को सुनवाई पूरी होने के 30 दिन के भीतर फैसला सुनाना होगा।
  7. पहली बार के अपराधी को रियायत: पहली बार अपराध करने वाले को, जिसने अधिकतम सज़ा का एक-तिहाई या एक-चौथाई हिस्सा काट लिया हो, जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
  8. फॉरेंसिक साक्ष्य अनिवार्य: 7 साल या उससे अधिक की सज़ा वाले सभी अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाना अनिवार्य कर दिया गया है।
  9. तलाशी और जब्ती के लिए वीडियोग्राफी: पुलिस को तलाशी और जब्ती (Search and Seizure) की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) – इंडियन एविडेंस एक्ट का स्थान

  1. इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की मान्यता: मोबाइल फोन, ई-मेल, लैपटॉप आदि से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और संदेशों को मजबूत कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता दी गई है।
  2. दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक परिभाषा: BSA ने दस्तावेज़ों की परिभाषा को डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रूपों को शामिल करने के लिए व्यापक बनाया है।
  3. गवाहों की सुरक्षा के लिए प्रावधान: गवाहों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं।
  4. साक्ष्य में तकनीकी प्रगति का समावेश: कानून में आधुनिक तकनीक और डिजिटल युग के साक्ष्यों को अदालत में स्वीकार्य बनाने पर जोर दिया गया है।

इन भारतीय कानूनों का मुख्य लक्ष्य सज़ा देने की जगह न्याय दिलाने पर केंद्रित एक अधिक कुशल, तकनीक-आधारित, और पीड़ित-केंद्रित आपराधिक न्याय प्रणाली स्थापित करना है।

क्या आप इनमें से किसी खास कानून (BNS, BNSS, या BSA) के किसी पहलू के बारे में अधिक जानना चाहेंगे? Comment करके बताये💖

धनयवाद


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