एलोरा केव्स
विश्व भर में अजंता की गुफाएं फेमस है और सालों से ये पर्यटको के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। भारत में स्थित महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद जिले में स्थित यूनेस्को (UNESCO) की एक विरासत हैं। एल्लोर केव्स (Ellora caves) औरंगाबाद के उत्तर-पश्चिम में लगभग 29 किलोमीटर और मुबई से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। यह गुफा दुनिया के सबसे बड़े रॉक-कट मठ-मंदिर गुफा परिसरों में से एक है। जिसमें बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म से सम्बंधित स्मारकों की विशेषता और कलाकृति देखने को मिलती है। जोकि 600-1000 Ce अवधि से सम्बंधित हैं।
यहां की गुफा 16 की अलग विशेषता हैं और यह दुनिया भर में सबसे बड़ी एकल अखंड रॉक खुदाई, कैलाश मंदिर, शिव को समर्पित एक रथ के आकार के स्मारक के लिए जानी जाती है। एल्लोरा गुफा में कैलाश मंदिर की खुदाई में वैष्णववाद, शक्तिवाद के अलावा दो प्रमुख हिंदू महाकाव्यों का सारांश देने वाले राहत पैनल के साथ-साथ देवी, देवताओं और पौराणिक कथाओं को प्रदर्शित करने वाली मूर्तिया स्थित हैं।
एलोरा की गुफाओ के कुछ रोचक तथ्य
- भारत के महाराष्ट्रा में स्थित राज्य के औरंगाबाद जिले से 30 किमी दूर एलोरा की गुफाएँ हैं। एलोरा की गुफाओं में 34 गुफाएँ शामिल हैं। ये गुफाएँ बेसाल्टिक की पहाड़ी के किनारे-किनारे बनी हुई हैं। इन गुफाओं में हिंदू, जैन और बौद्ध तीन धर्मों के प्रति दर्शाई आस्था का त्रिवेणी संगम का प्रभाव देखने को मिलता है। ये गुफाएँ 350 से 700 ईसा बाद के दौरान अस्तित्व में आईं।
- एलोरा की गुफाएँ दक्षिण की ओर 12 गुफाएँ बौद्ध धर्म (महायान संप्रदाय पर आधारित), मध्य की 17 गुफाएँ हिंदू धर्म और उत्तर की 5 गुफाएँ जैन धर्म पर आधारित हैं। बौद्ध धर्म पर आधारित गुफाओं की मूर्तियों में बुद्ध की जीवनशैली की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है। इन्हें देखकर तो यही लगता है मानो ध्यानमुद्रा में बैठे बुद्ध आज भी हमें शांति, सद्भाव व एकता का संदेश दे रहे हैं।
- अंजता-एलोरा आपके लिए एक अच्छा पर्यटनस्थल है। यहाँ की गुफाओं में की गई नायाब चित्रकारी व मूर्तिकला अपने आप में अद्वितीय है। इसके साथ ही यहाँ की गुफाएँ धार्मिक सद्माव की अनूठी मिसाल है।
- महाराष्ट्रा के औरंगाबाद से एलोरा की दूरी – 30 किलोमीटर औरंगाबाद से अजंता की दूरी – 101 किलोमीटर है |
- मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, नासिक, इंदौर, धूले, जलगाँव, शिर्डी आदि शहरों से औरंगाबाद के लिए बस सुविधा उपलब्ध है। सोमवार का दिन छोड़कर आप कभी भी अंजता- एलोरा जा सकते हैं।
एल्लोरा का रहस्य
दो युगों की कहानी बताती हैं :- 19वीं शताब्दी की यह गुफाओं को दो भागों में जा सकता है। एक भाग में बौद्ध धर्म के हीनयान और दूसरे भाग में महायान संप्रदाय की झलक देखने को मिलती है। हीनयान वाले भाग में 2 चैत्य हॉल (प्रार्थना हॉल) और 4 विहार (बौद्ध भिक्षुओं के रहने के स्थान) हैं तथा महायान वाले भाग में 3 चैत्य हॉल और 11 विहार हैं। जिनमें बौद्ध भिक्षुओं की मूर्तियां व चित्र हैं। हथौड़े और छेनी की सहायता से तराशी गई ये मूर्तियां अपने आप में अप्रतिम सुंदरता समेटे हैं।
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